सोनम वांगचुक: लद्दाख के शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद्
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
सोनम वांगचुक का जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख के उलेतोकपो गाँव में हुआ था। उनके परिवार में कोई स्कूल नहीं था, इसलिए उनकी माँ ने उन्हें घर पर ही शिक्षा दी। 9 वर्ष की आयु में, वे श्रीनगर के एक स्कूल में दाखिल हुए, जहाँ उन्हें हिंदी, उर्दू और अंग्रेज़ी जैसी भाषाओं में शिक्षा दी जाती थी, जो उनके लिए नई थीं। इस अनुभव ने उन्हें शिक्षा के महत्व और उसकी चुनौतियों को समझने में मदद की।
SECMOL की स्थापना
1988 में, सोनम वांगचुक ने अपने भाई और साथियों के साथ मिलकर 'Students' Educational and Cultural Movement of Ladakh' (SECMOL) की स्थापना की। इसका उद्देश्य लद्दाख की शिक्षा प्रणाली में सुधार करना और स्थानीय संस्कृति के अनुरूप शिक्षा प्रदान करना था।
महत्वपूर्ण घटनाएँ और योगदान
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1988: SECMOL की स्थापना
लद्दाख की शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए SECMOL की शुरुआत की।
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1994: ऑपरेशन न्यू होप
सरकारी स्कूलों में सुधार की पहल, जिसमें छात्रों का पास प्रतिशत 5% से बढ़कर 75% हुआ।
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2001: शिक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्ति
लद्दाख हिल काउंसिल सरकार में शिक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त।
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2013: आइस स्टूपा परियोजना
जल संकट से निपटने के लिए आइस स्टूपा बनाना शुरू किया। बर्फ के ढेर गर्मियों में पिघलकर पानी उपलब्ध कराते हैं।
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2018: रामोन मॅग्सेसे पुरस्कार
शिक्षा और पर्यावरण क्षेत्र में योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त।
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सितंबर 2025: लद्दाख प्रदर्शन और गिरफ्तारी
राज्य की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण गिरफ्तार। SECMOL का विदेशी योगदान लाइसेंस रद्द।
आधुनिक योगदान और प्रेरणा
सोनम वांगचुक लद्दाख के युवाओं को शिक्षा और विज्ञान में प्रेरित करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनका आइस स्टूपा मॉडल दुनिया भर में जल संरक्षण के लिए उदाहरण माना जाता है।
