Hindi sayari love se sambandhit
सादा सी एक लड़की है,हूर नहीं हैजिस्म से दूर है, दिल से दूर नहीं हैकैसे तोलें, दौलत से मोहब्बत को
हमे चढ़ा दौलत का फितूर नहीं है
जिंदगी में कुछ वक्त यादगार होते हैं।
शादी में कुछ लोग खास होते हैं।।
यू तो दूर होते हैं नजरों से।
पर उनके ऐहसास दिल के पास होते हैं।।
है कोई हकीकत या कोई हसरत है
आखिर किसके खातिर रातों की ये इबादत है
हकीम की हैरानगी पर लोग दुआ क्यू करने लगे
पीर कहते है ये आसार ऐ मोहब्बत है
कंडो के साथ ही
तुमने मेरा प्रेम भी थापा
उसे गोबर की तरह ढोया सिर पर,
घर से दूर ले जाकर,
खलिहान के किसी कोने में
प्यार से दुलार से
पूचकार कर, आकार दिया
धूप में सुखाया
बारिश से बचाया बार बार पलटाया
मैं और कंडे लायक बने
तुम्हारे लिए जलने को
बिन मंजिल का मुसाफिर उसे दर बदर भटकना पड़ा
तपती सहराव में नंगे पांव चला ही चलना पड़ा
ता_उम्र उसने खुदा का शुक्र ही अदा किया उसने
मोहब्बत का मरीज दुआ में मौत मांगा पड़ा
मुझे इसलिए भी लोग कमज़ोर समझते है
मेरे पास ताक़त नहीं किसी का दिल तोड़ने की
हौसलों को रात दिन दिखला रही है देखिए
परबतों से लड़ रही बल खा रही है देखिए
किसकी हिम्मत है जो उसको रोक लेगा राह में
धड़कनों की सिफारिश पर हम चाय पर गए
वरना वो गुलाबी शाम हमसे कजा न होता
अब सामने ही बैठा है महबूब तो क्या बात करे हम
निगाहे बात कर लेता तो वो खफा न होता
सीने के बल चल कर आया था मैं
फिर मोहब्बत में नाकाम हुआ
वफा तो दोनो तरफ से थी 1
फिर हमारा ही क्यू बुरा अंजाम हुआ
कलम तू कैसे लिख लेता है मेरे दर्द को
सलमान....तेरा दर्द लिखकर ही तो मेरा नाम हुआ
ऐन मुमकिन है दिल की मरम्मत हो जाए
मगर वक्त से पहले ही बंद बाजार हुआ
हमसे दोस्ती _तुम्हे मायूस कर देगी
अब तो खुद में ही मैं खाक हुआ
देख इंतजार में है लोग तेरी दास्तान सुनने के लिए
जा कर कह दो लोगो से दर्द से उनका इंतकाल हुआ
गिरा तो फ़िर कभी,उठा ना मिला
बंदों का हुज़ूम था खुदा ना मिला
ज़िस्म ना मिले,तो क्या हुआ यार
वो दिल से कभी जुदा ना मिला
परिंदों के जैसा था, इश्क़ उसका
कोई वादा, कोई वास्ता ना मिला
ऐसे हुआ दिल पर,कब्ज़ा उसका
धड़कनों को भी रास्ता ना मिला
उसके शाहपरस्त भी हैं बादशाह
कोई भी पत्थर तरास्ता ना मिला